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Thursday, 13 December 2018

History of Chardham yatra in hindi

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HISTORY OF CHARDHAM YATRA IN HINDI

चारधाम (CharDham yatra)का इतिहास, महाभारत काल में पांडवों के द्वारा “बद्रीनाथ”, “केदारनाथ”, “गंगोत्री” और “यमुनोत्री” के रूप में परिभाषित किया गया है। पांडवों का मानना था कि ये chardham yatra ऐसी है, जहाँ लोग जाकर अपने पापों को शुद्ध कर सकते हैं। 


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CHARDHAM


आधुनिक दिनों में, चारधाम भारत में चार तीर्थ स्थलों के नाम हैं जो हिंदुओं द्वारा व्यापक रूप से सम्मानित हैं। इसमें बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम शामिल हैं। हिंदुओं द्वारा अपने जीवनकाल के दौरान चारधाम (chardham yatra) की यात्रा करना बहुत बड़ा पुण्य  माना जाता है।। आदि शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चारधाम में चार वैष्णव तीर्थयात्रा शामिल हैं।

भारत के उत्तराखंड राज्य में प्राचीन तीर्थयात्रायों अर्थात यमुनोत्री , गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को छोटा धाम के रूप में जाना जाता है।


भक्ति ऐसी की भोले भी दास बन गये इस अनोखी कहानी को जरुर पढ़े !


CharDham Story in Hindi 

आइये Chardham yatra के बारे में इस पोस्ट में हम इन चीजो के बारे में जानेगे फिर हम सभी धामों के बारे में अलग अलग से पूरी विस्तार पूर्वक जानेगे !
CHARDHAM yatra क्या हैं?  
CHARDHAM कहाँ हैं? 
CHARDHAM के कहानी के बारे में जाने ? 


बद्रीनाथ

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, बद्रीनाथ तब प्रसिद्ध हुआ जब विष्णु के अवतार नर-नारायण ने वहां तपस्या की। उस समय वह जगह बेरी के पेड़ से भरी थी।


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संस्कृत भाषा में उन्हें बद्री कहा जाता है, विशेष स्थान जहां नर-नारायण ने तपस्या की, एक बड़ा बेरी का पेड़ उसे बारिश और सूरज से बचाने के लिए ढक गया। 

स्थानीय लोगों का मानना है कि माता लक्ष्मी नारायण को बचाने के लिए बेरी का पेड़ बन गयी। तपस्या के बाद, नारायण ने कहा, लोग हमेशा उनके नाम से पहले उसका नाम लेंगे, इसलिए हिंदू हमेशा "लक्ष्मी-नारायण" का उल्लेख करते हैं। 

इसलिए इसे बद्री-नाथ यानी बेरी वन के भगवान कहा जाता था। यह सब सत-युग में हुआ था। तो बद्रीनाथ को पहले धाम के रूप में जाना जाने लगा।

रामेश्वरम

दूसरी जगह, रामेश्वरम जब त्रेतायुग में भगवान राम रावन से युद्ध करने लंका जा रहे थे तो युद्ध से पूर्व  भगवान राम ने यहां एक शिव-लिंग बनाया और भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इसकी पूजा की।

रामेश्वरम नाम का अर्थ है "भगवान राम का भगवान"। राम भगवान विष्णु के अवतार है।


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 द्वारका

तीसरे धाम द्वारका को द्वापर युग में इसका महत्व मिला जब भगवान विष्णु के एक अन्य अवतार भगवान कृष्ण ने उनके जन्मस्थान मथुरा के बजाय द्वारका को अपना निवास बनाया।


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शंकराचार्य पीठ

चारों  धाम में चौथा शंकराचार्य पीठ है, जिसमें हिन्दू धर्म के बारे में शिक्षा दी जाती है | शंकराचार्य पीठ ने कम से कम चार हिंदू मठवासी संस्थान बनाए है, उन्होंने इन चार मठों (संस्कृत: मठ) (संस्थानों / आश्रमों ) के तहत हिंदू अभ्यासकों का आयोजन किया,  इन चार मठों के मुख्यालय – पश्चिम में द्वारिका, पूर्व में जगन्नाथ पुरी, दक्षिण में श्रृंगेरी शारदा पीठम और उत्तर में बदरिकाश्रम) के तहत हिंदू अभ्यासकों का आयोजन किया।


हिन्दू पुराणों में हरि (विष्णु) और हर (शिव) को शाश्वत मित्र कहा जाता है। यह कहा जाता है कि जहां भी भगवान विष्णु रहते है, भगवान शिव भी वही आसपास रहते हैं। चार धाम भी इसके अपवाद नहीं हैं। इसलिए  केदारनाथ को बद्रीनाथ की जोड़ी के रूप में माना जाता है| रंगनाथ स्वामी को रामेश्वरम की जोड़ी माना जाता है| सोमनाथ को द्वारिका की जोड़ी के रूप में माना जाता है, हालांकि यहां एक बात ध्यान देने योग्य यह भी है कि कुछ परंपराओं के अनुसार चार धाम बद्रीनाथ, रंगनाथ-स्वामी, द्वारिका और जगन्नाथ-पुरी हैं, जिनमें से चार वैष्णव स्थल हैं, और उनसे संबंधित स्थान क्रमशः केदारनाथ, रामेश्वरम, सोमनाथ और लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर (या गुप्तेश्वर हो सकते हैं) हैं।

Chardham (चारधाम ) कहाँ हैं ?

जगन्नाथ मंदिर, पुरी

पूर्वी भारत के पूर्व ओडिशा राज्य में जगन्नाथ मंदिर, पुरी स्थित है। जो बंगाल की खाड़ी के तट पर है। जगन्नाथ पुरी के मुख्य भगवान श्री कृष्ण हैं जो की जगन्नाथ  के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं ! यह एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान कृष्ण अपने बहन सुभद्रा और भाई भगवान बलभद्र और भगवान जगन्नाथ के साथ पूजे जाते है। यहां का मुख्य मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण राजा चोड़ा गंगा देव और राजा त्रितिया भीम देव ने किया था।

पुरी गोवर्धन मठ, चार मुख्य संस्थानों में से एक आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठों में से है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर, उनमें से तीनों हर जगह एक साथ हैं कल युग में पुरी में जगन्नाथ मंदिर के रूप श्रीमंदिर में जगन्नाथ -विष्णु, बालभद्र-महेश्वर और सुभद्रा-ब्रह्मा का एक साथ होना यह उड़िया के लोगों के लिए यह सम्मान की बात है, पुरी में यह एक विशेष दिन होता है उस दिन सभी लोग मिलकर जश्न मनाते है, जिसे हम रथ यात्रा (“रथ महोत्सव”) के नाम से जानते है।

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रामेश्वरम मंदिर Rameshwaram Temple
रामेश्वरम भारत के दक्षिण में स्थित तमिलनाडु राज्य में है। यह भारतीय प्रायद्वीप के मानार की खाड़ी में स्थित है। ग्रंथो के अनुसार, यह वह जगह है जहां भगवान राम ने लंका पर आक्रमण से पूर्व भगवान शिव की समुद्र के रेत से शिवलिंग बना कर उनकी पूजा किये था और एक पुल बनाया था जो की  राम सेतु के नाम से जाना जाता हैं । जिसका आभास आज भी वहां मिलती हैं !

रामेश्वरम हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर, उनमें से तीनों हर जगह एक साथ हैं !

द्वारका Dwarka

Dwarka भारत के पश्चिम गुजरात शहर में स्थित हैं जिसका नाम संस्कृत भाषा में "द्वार" यानी 'द्वार' शब्द से लिया गया है। जहां गोमती नदी अरब सागर में विलीन हो जाती है। हालांकि, यह नदी गोमती एक ही गोमती नदी नहीं है जो गंगा नदी की सहायक है। द्वारका का पौराणिक शहर भगवान कृष्ण का निवास स्थान था। यह प्रसिद्ध शहर द्वारिका भारत के पश्चिमी भाग में स्थित है । 

यह माना जाता है कि समुद्र के नुकसान और विनाश के कारण, द्वारिका ने छह बार जलमग्न किया, और आधुनिक दिनों में इस जगह पर बना द्वारिका 7 वां शहर है। 

बद्रीनाथ मंदिर Badrinath Temple

बद्रीनाथ
उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह अलकनंदा नदी के किनारे गढ़वाल पहाड़ियों में है। यह शहर नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं और नीलकंथा शिखर की छाया में (6,560 मीटर) के बीच स्थित है।


निवेदन 

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आपका एक share हिन्दुधर्म को चार कदम आगे ले जाएगा !

राजा के चिता पर बने श्यामा काली की अनोखी कहानी को जरुर पढ़े !

Sunday, 2 December 2018

राजा के चिता पर बना हैं श्यामा काली मंदिर जाने पूरी कहानी !

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राजा के चिता पर बना हैं श्यामा काली मंदिर आइये जानते हैं क्या हैं इसके पीछे की कहानी !
बिहार के दरभंगा जिले में राजा के चिता पर बना हैं श्यामा काली मंदिर इस मंदिर को मनोकामना मंदिर  के नाम से भी जाना जाता है। मां काली के धाम  में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मांगलिक कार्य करने आते हैं ! 


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हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता हैं की किसी शुभ कार्य होने के एक साल तक किसी भी दाह संस्कार या किसी भी श्मशान भूमि में नही जाना चाहिए और ना ही श्राध्द का दाना खाना चाहिए !

श्यामा मंदिर , जो श्मशान भूमि पर हैं जहाँ लोग शुभ कार्य मुंडन,उपनयन, विवाह  जैसी सभी मांगलिक कार्य करने आते हैं यहाँ हजारो की संख्या में लोग प्रतिदिन आते हैं ! श्यामा मंदिर में सालो के सभी दिन कीर्तन-भजन और धार्मिक कार्यक्रम होते रहता हैं !

Friday, 30 November 2018

Story of ugna mahadev | भक्ति ऐसी की भोले भी दास बन गये

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Story of ugna mahadev  | भक्ति ऐसी की भोले भी दास बन गये 

कहते है ना अगर भक्ति में सकती हो तो हरकुछ संभव हैं Ugna mahadev और vidyapati की कहानी ये बखूबी बयां करती हैं आज हम बिहार के मधुबनी जिले में उपस्थित ugna mahadev mandir bhawanipur के बारे में बतायेंगे ये mandir उगना महादेव व उग्रनाथ मंदिर के नाम से काफी प्रसिद्ध है। 


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महाकवि विद्यापति मैथिली के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं। वे भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे उन्होंने भगवान शिव पर अनेको मैथिल गीतों की रचना की है। वो इतने बड़े भक्त थे उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं की भगवान शिव उनके यहाँ उनके दास बनकर रहे, बात 1360 इसवी की हैं जब भगवान भोलेनाथ स्वंय इस मृत्युलोक पर ugna बनकर उनकी रचना सुनने के लिए उनके पास दास बनकर रहे !

Wednesday, 28 November 2018

Manikeshwari bhagwati

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Manikeshwari Bhagwati से जुड़ी कहानी !

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Manikeshwari 


Manikeshwari bhagwati Damodarpur गावं के दक्षिण दिशा में स्थित हैं , सिद्धपीठ manikeshwari bhagwati  के बारे में ऐसा कहा जाता हैं की जो भी भक्त पूरी श्रधा से इनके शरण में आया हैं माँ manikeshwari mata ने उसकी सभी कार्यो को सफल की हैं !

Wednesday, 21 November 2018

Uchchaith Bhagwati

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उच्चैठवासनी भगवती से जुड़ी कहान ी!

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Uchchaith Bhagwati

Uchchaith bhagwati के बारे में जाने !

प्राचीन मध्य से मिथिलांचलक धरोहर Uchchaith bhagwati जो कि बिहार के मधुबनी जिला में बेनीपट्टी से चार किलोमीटर पश्चिम दिशा में एक पर्यटक स्थलों में से है ये मंदिर प्राचीन काल से ही सिद्धपीठ Uchchaithvasni bhagwati के नाम से प्रचलित हैं इस मंदिर मे छिन्नमस्तिका दुर्गा माँ विराजित है इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु पूरी निष्ठा से विश्वास  से जो भी मनोकामनाएं माँगता है वो उसे मिल जाता है इस मंदिर से एक बहुत ही प्राचीन कहानी जुड़ी हुई है इस मंदिर के पूर्व दिशा में एक संस्कृत विद्यालय है जिसके और मंदिर के बीच एक नदी बहती है ।

Tuesday, 13 November 2018

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